Wednesday, December 17, 2025

December 17, 2025

Tractor Subsidy 2026 | किसान ट्रैक्टर सब्सिडी कैसे मिलेगी

 

Tractor Subsidy 2026


2026 में किसान ट्रैक्टर पर सब्सिडी कैसे मिलेगी? कौन‑सा ट्रैक्टर खरीदें, आवेदन और पूरी प्रक्रिया


प्रस्तावना

आज के समय में ट्रैक्टर खेती का सबसे जरूरी साधन बन चुका है। जुताई से लेकर बुवाई, स्प्रे, ट्रॉली ढुलाई और कटाई तक – हर काम ट्रैक्टर से जुड़ा है। लेकिन ट्रैक्टर की कीमत 6 लाख से 12 लाख रुपये तक होने के कारण छोटे और मध्यम किसानों के लिए इसे खरीदना आसान नहीं होता

इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारें समय‑समय पर Tractor Subsidy Scheme चलाती हैं। उम्मीद है कि 2026 में ट्रैक्टर सब्सिडी योजना को और बेहतर व डिजिटल बनाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें।

यह लेख आपको बताएगा:

  • 2026 में ट्रैक्टर पर सब्सिडी कैसे मिलेगी

  • कौन‑सा ट्रैक्टर किसान को खरीदना चाहिए

  • ट्रैक्टर खरीदने से पहले क्या ध्यान रखें

  • सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें (Step‑by‑Step)

  • जरूरी दस्तावेज और सावधानियाँ


Tractor subsidy scheme for farmers 2026



Tractor Subsidy 2026 क्या है?

Tractor Subsidy 2026 एक सरकारी सहायता योजना है, जिसके तहत किसानों को नया ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार द्वारा कीमत का कुछ हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है

सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है।

👉 यह योजना केंद्र सरकार + राज्य सरकारों द्वारा मिलकर चलाई जाती है, इसलिए सब्सिडी प्रतिशत राज्य अनुसार अलग‑अलग हो सकता है।


2026 में ट्रैक्टर सब्सिडी क्यों जरूरी है?

  • खेतों में मजदूरों की कमी

  • खेती की लागत लगातार बढ़ रही है

  • समय पर काम न होने से नुकसान

  • छोटे किसानों को मशीनरी तक पहुंच

ट्रैक्टर सब्सिडी का मकसद है खेती को यंत्रीकृत करना और किसान की आय बढ़ाना


Tractor Subsidy 2026 – कितनी सब्सिडी मिल सकती है?

संभावित रूप से 2026 में:

  • 20% से 50% तक सब्सिडी

  • अधिकतम ₹1.50 लाख से ₹3.50 लाख तक सहायता

  • SC/ST, महिला किसान और छोटे किसानों को अतिरिक्त लाभ

अंतिम सब्सिडी राशि राज्य सरकार की गाइडलाइन पर निर्भर करेगी।


कौन‑कौन किसान पात्र होंगे?

संभावित पात्रता शर्तें:

  • किसान के नाम कृषि भूमि हो

  • पहले से ट्रैक्टर सब्सिडी न ली हो

  • उम्र 18 वर्ष से अधिक

  • बैंक खाता आधार से लिंक हो

  • राज्य का स्थायी निवासी हो

FPO और किसान समूह के माध्यम से भी आवेदन संभव हो सकता है।


2026 में कौन‑सा ट्रैक्टर खरीदें? (Farm Size के अनुसार)

1️⃣ छोटे किसान (1–5 एकड़)

  • 20–30 HP ट्रैक्टर

  • कम ईंधन खपत

  • हल्का और सस्ता

उदाहरण: Swaraj 724, Mahindra Yuvraj, Sonalika DI 30


2️⃣ मध्यम किसान (5–15 एकड़)

  • 35–45 HP ट्रैक्टर

  • मल्टी‑पर्पज उपयोग

उदाहरण: Mahindra 275, Swaraj 735, John Deere 5036


3️⃣ बड़े किसान (15+ एकड़)

  • 50–60 HP ट्रैक्टर

  • भारी उपकरणों के लिए

उदाहरण: New Holland 3630, John Deere 5050D, Sonalika Tiger

👉 हमेशा अपने खेत के आकार और काम के अनुसार ट्रैक्टर चुनें


ट्रैक्टर खरीदने से पहले जरूरी बातें

  • HP जरूरत से ज्यादा न लें

  • सर्विस सेंटर नजदीक हो

  • माइलेज और मेंटेनेंस खर्च देखें

  • सब्सिडी में अप्रूव्ड मॉडल ही चुनें


Tractor Subsidy 2026 के लिए आवेदन कैसे करें?

Step‑by‑Step आवेदन प्रक्रिया

1️⃣ राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाएँ
2️⃣ Tractor Subsidy / Farm Mechanization सेक्शन चुनें
3️⃣ ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें
4️⃣ ट्रैक्टर मॉडल और डीलर चुनें
5️⃣ दस्तावेज अपलोड करें
6️⃣ आवेदन सबमिट करें
7️⃣ अप्रूवल के बाद ट्रैक्टर खरीदें
8️⃣ DBT के जरिए सब्सिडी खाते में आएगी


जरूरी दस्तावेज

  • आधार कार्ड

  • भूमि रिकॉर्ड (खसरा/जमाबंदी)

  • बैंक पासबुक

  • पासपोर्ट साइज फोटो

  • कोटेशन / प्रोफार्मा इनवॉइस


क्या लोन के साथ सब्सिडी मिलेगी?

हाँ, किसान बैंक लोन + ट्रैक्टर सब्सिडी दोनों का लाभ ले सकता है।

  • पहले ट्रैक्टर खरीदा जाएगा

  • बाद में सब्सिडी DBT से आएगी


Punjab, Haryana, UP किसानों के लिए खास जानकारी

  • कस्टम हायरिंग सेंटर पर अतिरिक्त सब्सिडी

  • छोटे किसानों को प्राथमिकता

  • सामूहिक खेती को बढ़ावा


सावधानियाँ (बहुत जरूरी)

  • बिना सरकारी पोर्टल आवेदन न करें

  • एजेंट या दलाल से बचें

  • सब्सिडी के नाम पर पैसा न दें

  • बिल और रसीद सुरक्षित रखें


निष्कर्ष

Tractor Subsidy 2026 किसानों के लिए खेती को आसान और आधुनिक बनाने का बड़ा अवसर है। सही ट्रैक्टर का चयन, सही समय पर आवेदन और सही जानकारी से किसान लाखों रुपये की बचत कर सकता है।

👉 सलाह यही है कि किसान पहले जानकारी लें, फिर ट्रैक्टर खरीदें और सरकारी सब्सिडी का पूरा लाभ उठाएँ।



📊 Tractor Subsidy 2026 – Quick Overview

Category                                            Details
Subsidy Range                                    20% – 50%
Max Amount                                    ₹1.5 – ₹3.5 Lakh
Eligible Farmers                                    Small, Medium, SC/ST, Women
Application Mode                                    Online (Agri Dept Portal)
Payment Method                                    DBT to Bank Account

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. क्या एक किसान दो बार ट्रैक्टर सब्सिडी ले सकता है?

नहीं, सामान्यतः एक किसान को जीवन में एक बार ही ट्रैक्टर सब्सिडी मिलती है।

Q2. क्या पुराना ट्रैक्टर बदलने पर सब्सिडी मिलेगी?

नहीं, सब्सिडी केवल नए ट्रैक्टर पर ही दी जाती है।

Q3. क्या बिना जमीन के ट्रैक्टर सब्सिडी मिल सकती है?

अधिकांश राज्यों में कृषि भूमि होना जरूरी है।

Q4. सब्सिडी पैसा पहले मिलेगा या बाद में?

पहले ट्रैक्टर खरीदा जाता है, बाद में DBT से सब्सिडी आती है।

Q5. आवेदन रिजेक्ट क्यों हो जाता है?

गलत दस्तावेज, पहले सब्सिडी ली होना, या quota पूरा होना कारण हो सकता है।



📣 Call To Action (CTA)

👉 अगर आप 2026 में ट्रैक्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस जानकारी को सेव करें और अपने किसान साथियों के साथ जरूर शेयर करें

👉 नई सरकारी योजनाओं और सब्सिडी अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट को फॉलो करें


🔔 Disclaimer Note

यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। सब्सिडी से जुड़ी अंतिम शर्तें राज्य/केंद्र सरकार की आधिकारिक अधिसूचना पर निर्भर करेंगी।

December 17, 2025

Subsidy On Solar Pump & Irrigation 2026 | New Government Scheme For Farmers

 

2026 में किसानों के लिए सोलर पंप और सिंचाई पर नई सरकारी सब्सिडी योजना


प्रस्तावना

भारत में खेती की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई और बिजली/डीजल की बढ़ती लागत है। कई राज्यों में आज भी किसान डीजल पंप से सिंचाई करते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और मुनाफा कम होता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार 2026 में सोलर पंप और माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप/स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देने के लिए एक नई और विस्तारित सब्सिडी योजना लाने की तैयारी कर रही है।

यह योजना PM-KUSUM, माइक्रो इरिगेशन सब्सिडी और राज्य योजनाओं को एक मजबूत रूप देकर लागू की जा सकती है, ताकि किसानों को सस्ती, टिकाऊ और बिजली‑मुक्त सिंचाई सुविधा मिल सके।

Solar pump & irrigation subsidy 2026



Solar Pump & Irrigation Subsidy 2026 क्या है?

Solar Pump & Irrigation Subsidy 2026 एक प्रस्तावित सरकारी योजना है, जिसके तहत किसानों को:

  • सोलर पंप लगाने पर भारी सब्सिडी

  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम पर वित्तीय सहायता

  • बिजली और डीजल पर निर्भरता से मुक्ति

इस योजना का मुख्य उद्देश्य है खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना


योजना की शुरुआत कब होगी?

सरकारी संकेतों के अनुसार यह योजना जनवरी 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है। पहले चरण में जल‑संकट और बिजली‑संकट वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद इसे पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा।


योजना लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत में:

  • डीजल की कीमत लगातार बढ़ रही है

  • बिजली आपूर्ति कई क्षेत्रों में अनियमित है

  • भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है

इन समस्याओं के कारण किसान समय पर सिंचाई नहीं कर पाते। सोलर पंप और माइक्रो इरिगेशन इन सभी समस्याओं का स्थायी समाधान हैं।


Solar Pump Subsidy 2026 – संभावित लाभ

🔆 सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी मिल सकती है?

संभावित रूप से किसानों को:

  • 60% से 80% तक सब्सिडी

  • छोटे और सीमांत किसानों को अतिरिक्त सहायता

  • शेष राशि पर आसान लोन सुविधा

सोलर पंप एक बार लगने के बाद 20–25 साल तक लगभग मुफ्त सिंचाई की सुविधा देता है।


Micro Irrigation Subsidy 2026 (Drip & Sprinkler)

नई योजना के तहत माइक्रो इरिगेशन पर विशेष जोर दिया जाएगा:

  • ड्रिप सिंचाई पर 55%–75% तक सब्सिडी

  • स्प्रिंकलर सिस्टम पर 50%–70% सहायता

  • बागवानी और सब्जी किसानों को प्राथमिकता

👉 इससे पानी की बचत होती है और फसल उत्पादन 30–40% तक बढ़ सकता है।


PM-KUSUM से क्या होगा नया?

Solar Pump & Irrigation Subsidy 2026 को PM‑KUSUM योजना का उन्नत रूप माना जा रहा है। इसमें:

  • आवेदन प्रक्रिया और सरल होगी

  • DBT के जरिए सीधे सब्सिडी

  • सोलर पैनल + पंप + मोटर का एकीकृत पैकेज


कौन‑कौन किसान होंगे पात्र?

संभावित पात्रता:

  • छोटे और सीमांत किसान

  • जिनके पास कृषि भूमि है

  • PM किसान योजना के पंजीकृत लाभार्थी

  • बिजली या डीजल पंप का उपयोग करने वाले किसान

FPO और सहकारी समितियों के माध्यम से भी आवेदन संभव हो सकता है।


आवेदन प्रक्रिया कैसी हो सकती है?

संभावित आवेदन प्रक्रिया:

  1. राज्य/केंद्र सरकार का ऑनलाइन पोर्टल

  2. आधार, बैंक खाता और भूमि रिकॉर्ड

  3. पंप क्षमता का चयन (HP के अनुसार)

  4. तकनीकी स्वीकृति

  5. स्थापना और सब्सिडी DBT

इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी।


किसानों को क्या‑क्या फायदे होंगे?

✅ डीजल और बिजली खर्च शून्य के करीब
✅ समय पर सिंचाई
✅ पर्यावरण संरक्षण
✅ आय में सीधी बढ़ोतरी
✅ सरकारी सब्सिडी का सीधा लाभ


Punjab, Haryana, UP किसानों के लिए खास लाभ

  • धान और गन्ना क्षेत्र में बिजली बचत

  • सब्जी और बागवानी में ड्रिप सिंचाई

  • भूजल संरक्षण

  • MSP पर निर्भरता कम

  • भूजल संरक्षण में मदद करेगी

  • बिजली व डीजल खर्च घटाएगी

  • सब्जी, बागवानी और गन्ना किसानों को सीधा लाभ


सावधानियाँ

  • केवल सरकारी पोर्टल से ही आवेदन करें

  • निजी एजेंटों से सावधान रहें

  • सब्सिडी की राशि पहले न दें

  • सभी दस्तावेज सही रखें



📊 Solar Pump & Irrigation Subsidy 2026 – एक नजर में

सुविधा                                संभावित सब्सिडी
सोलर पंप                                                    60% – 80%
ड्रिप सिंचाई                                                    55% – 75%
स्प्रिंकलर सिस्टम                                                    50% – 70%
लोन सुविधा                                                    कम ब्याज पर
भुगतान                                                    DBT (Direct Benefit Transfer)

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. Solar Pump Subsidy 2026 कब से लागू होगी?

सरकारी संकेतों के अनुसार यह योजना जनवरी 2026 से चरणबद्ध रूप से लागू की जा सकती है।

Q2. क्या छोटे किसान भी सोलर पंप ले सकते हैं?

हाँ, छोटे और सीमांत किसानों को इस योजना में प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

Q3. क्या ड्रिप और स्प्रिंकलर पर अलग से सब्सिडी मिलेगी?

हाँ, माइक्रो इरिगेशन के लिए अलग सब्सिडी का प्रावधान हो सकता है।

Q4. क्या PM-KUSUM के किसान भी पात्र होंगे?

संभावना है कि PM-KUSUM लाभार्थियों को नई योजना में स्वतः शामिल किया जाए।

Q5. आवेदन ऑनलाइन होगा या ऑफलाइन?

अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होने की संभावना है।

Tuesday, December 16, 2025

December 16, 2025

जनवरी 2026 में आने वाली नई सरकारी कृषि योजना | Pm धन-धान्य कृषि योजना

 

PM धन-धान्य कृषि योजना 2026 – किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई पहल


प्रस्तावना

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ आज भी देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। बदलते मौसम, बढ़ती लागत, अनिश्चित बाजार भाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार समय‑समय पर नई कृषि योजनाएँ लाती रही है।

इसी कड़ी में जनवरी 2026 से लागू होने वाली प्रस्तावित नई योजना – “प्रधानमंत्री धन‑धान्य कृषि योजना (PM Dhan Dhaanya Krishi Yojana 2026)” किसानों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर साबित हो सकती है। यह योजना PM किसान, सब्सिडी और फसल बीमा जैसे मौजूदा कार्यक्रमों को और मजबूत करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर केंद्रित है।

यह आर्टिकल खास तौर पर किसानों, कृषि छात्रों और ग्रामीण युवाओं के लिए लिखा गया है, ताकि वे इस आने वाली योजना को सरल भाषा में समझ सकें।

Pm धन-धान्य कृषि योजना



PM धन‑धान्य कृषि योजना क्या है?

PM धन‑धान्य कृषि योजना एक समग्र (Integrated) कृषि विकास योजना है, जिसका उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि किसानों को उत्पादन, तकनीक, बीमा, बाजार और सब्सिडी – सभी स्तरों पर मजबूत बनाना है।

इस योजना के तहत सरकार का फोकस होगा:

  • कम उत्पादन वाले जिलों में कृषि सुधार

  • छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना

  • आधुनिक तकनीक और डिजिटल खेती को बढ़ावा देना

  • फसल नुकसान की भरपाई के लिए बेहतर बीमा सुरक्षा

सरल शब्दों में कहें तो यह योजना खेती को सिर्फ जीविका नहीं बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।


योजना की शुरुआत कब होगी?

सरकारी संकेतों के अनुसार PM धन‑धान्य कृषि योजना को जनवरी 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। शुरुआत में इसे चयनित जिलों में लागू किया जाएगा और बाद में पूरे देश में विस्तार किया जाएगा।

यह योजना वित्तीय वर्ष 2025‑26 के बजट प्रावधानों के अंतर्गत लाई जा सकती है, ताकि रबी और खरीफ दोनों सीजन में किसान इसका लाभ उठा सकें।


योजना लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

आज के समय में किसान कई समस्याओं से जूझ रहा है:

  1. खेती की बढ़ती लागत – बीज, खाद, डीजल, मजदूरी सब महंगे हो चुके हैं

  2. मौसम की अनिश्चितता – कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी ओलावृष्टि

  3. फसल का सही दाम न मिलना

  4. बीमा क्लेम में देरी और जटिल प्रक्रिया

  5. तकनीक और जानकारी की कमी

PM धन‑धान्य कृषि योजना इन सभी समस्याओं को एक साथ संबोधित करने का प्रयास है।


योजना के मुख्य उद्देश्य

1️⃣ किसानों की आमदनी बढ़ाना

इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य है किसानों की शुद्ध आय (Net Income) में वृद्धि करना, न कि सिर्फ उत्पादन बढ़ाना।

2️⃣ आधुनिक और स्मार्ट खेती को बढ़ावा

ड्रोन, सॉइल हेल्थ कार्ड, मौसम ऐप, डिजिटल रिकॉर्ड – इन सभी को खेती से जोड़ना।

3️⃣ जोखिम कम करना

फसल बीमा को सरल, तेज और पारदर्शी बनाना ताकि नुकसान की स्थिति में किसान को तुरंत राहत मिले।

4️⃣ सब्सिडी को सीधे किसान तक पहुँचाना

Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए सब्सिडी सीधे बैंक खाते में।


PM किसान योजना से कैसे जुड़ेगी यह नई योजना?

PM धन‑धान्य कृषि योजना को PM किसान सम्मान निधि से जोड़कर देखा जा रहा है।

संभावित रूप से:

  • PM किसान के लाभार्थी किसानों को प्राथमिकता मिलेगी

  • ₹6000 सालाना सहायता के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन

  • डिजिटल किसान प्रोफाइल के आधार पर योजना का लाभ

इससे किसानों को बार‑बार आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


सब्सिडी से जुड़े संभावित लाभ

इस योजना के तहत किसानों को निम्नलिखित सब्सिडी मिलने की संभावना है:

  • उन्नत बीज पर सब्सिडी

  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम

  • सोलर पंप और कृषि मशीनरी

  • जैविक खेती के इनपुट्स

सब्सिडी का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।


फसल बीमा में क्या होगा नया?

PM धन‑धान्य कृषि योजना के अंतर्गत फसल बीमा को और मजबूत किया जाएगा:

  • क्लेम सेटलमेंट में देरी कम होगी

  • सैटेलाइट और ड्रोन से फसल नुकसान का आकलन

  • मोबाइल ऐप के जरिए क्लेम स्टेटस

  • छोटे किसानों के लिए कम प्रीमियम

इससे किसान प्राकृतिक आपदा के बाद दोबारा खड़े हो सकेंगे।


कौन‑कौन किसान होंगे पात्र?

संभावित पात्रता:

  • छोटे और सीमांत किसान

  • PM किसान योजना के पंजीकृत लाभार्थी

  • जिनके पास वैध भूमि रिकॉर्ड

  • FPO और सहकारी समितियों से जुड़े किसान

सरकार का लक्ष्य है कि अधिकतम किसानों को बिना जटिल शर्तों के योजना में शामिल किया जाए।


आवेदन प्रक्रिया कैसी हो सकती है?

हालाँकि आधिकारिक दिशानिर्देश आने बाकी हैं, लेकिन संभावित प्रक्रिया:

  1. ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप

  2. आधार और बैंक खाते से लिंक

  3. भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन

  4. डिजिटल अप्रूवल

इससे किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।


किसानों को क्या‑क्या फायदे होंगे?

✅ स्थायी और सुनिश्चित आय
✅ जोखिम में कमी
✅ आधुनिक तकनीक की पहुँच
✅ सब्सिडी और बीमा का सीधा लाभ
✅ खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित करने का मौका


ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

इस योजना से सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि:

  • ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा

  • कृषि आधारित उद्योग मजबूत होंगे

  • युवाओं का खेती की ओर रुझान बढ़ेगा


सावधानियाँ और सुझाव

  • अफवाहों पर ध्यान न दें

  • केवल सरकारी पोर्टल से जानकारी लें

  • आधार और बैंक विवरण सही रखें

  • स्थानीय कृषि अधिकारी से संपर्क में रहें


निष्कर्ष

PM धन‑धान्य कृषि योजना 2026 किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आ रही है। यह योजना खेती को सुरक्षित, आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय किसान आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है।

👉 किसानों को चाहिए कि वे समय रहते जानकारी जुटाएँ और इस योजना का पूरा लाभ उठाएँ।



📊 योजना का सार – एक नजर में (तालिका)

विषय                                                              विवरण
योजना का नाम                                                                PM धन-धान्य कृषि योजना
लागू होने की तिथि                                                                जनवरी 2026 (संभावित)
मुख्य उद्देश्य                                                                किसानों की आय बढ़ाना
लाभ                                                                सब्सिडी, बीमा, तकनीक
लक्षित किसान                                                                छोटे व सीमांत किसान
भुगतान तरीका                                                                DBT (सीधे खाते में)

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. PM धन-धान्य कृषि योजना क्या PM किसान से अलग है?

हाँ, यह योजना PM किसान से जुड़ी होगी लेकिन इसमें अतिरिक्त लाभ जैसे सब्सिडी, बीमा और तकनीकी सहायता शामिल होगी।

Q2. क्या सभी किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा?

संभावना है कि PM किसान के पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, बाद में दायरा बढ़ाया जा सकता है।

Q3. क्या इसके लिए नया आवेदन करना पड़ेगा?

सरकार डिजिटल किसान प्रोफाइल के आधार पर ऑटो-लिंकिंग की योजना बना सकती है, जिससे नया आवेदन जरूरी न हो।

Q4. फसल बीमा में क्या फायदा मिलेगा?

क्लेम प्रक्रिया आसान होगी, ड्रोन व सैटेलाइट से नुकसान का आकलन और तेज भुगतान संभव होगा।

Q5. योजना की सही जानकारी कहाँ से मिलेगी?

आधिकारिक सरकारी पोर्टल, कृषि विभाग और PM किसान वेबसाइट से ही जानकारी लें।


📌 Punjab / Haryana / UP किसानों के लिए खास संकेत

इस योजना से पंजाब, हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों में:

  • धान-गेहूं के साथ फसल विविधिकरण को बढ़ावा

  • माइक्रो इरिगेशन व सोलर पंप सब्सिडी

  • MSP पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक आय


📣 Call To Action (CTA )

👉 अगर आप किसान हैं या किसान परिवार से जुड़े हैं, तो इस जानकारी को अपने गांव और व्हाट्सऐप ग्रुप में जरूर साझा करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।

👉 नई सरकारी योजनाओं की अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क करें।


डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सरकारी घोषणाओं और संभावित नीतिगत संकेतों पर आधारित है। योजना के अंतिम नियम और शर्तें आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही मान्य होंगी।

Wednesday, November 12, 2025

November 12, 2025

PAU ਸਬਜ਼ੀ ਪਨੀਰੀ ਵਿਕਰੀ: ਟਮਾਟਰ (Punjab Sartaj), ਮਿਰਚ, ਬੈਂਗਣ - PAU Gate No. 1 Nursery

PAU ਤੋਂ ਸਬਜ਼ੀ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਵਿਕਰੀ! 🌶️🍅🍆


ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU) ਦੇ ਗੇਟ ਨੰਬਰ ਇੱਕ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸਬਜ਼ੀ ਨਰਸਰੀ ਉਤਪਾਦਨ ਫਾਰਮ 'ਤੇ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਤਾਜ਼ਾ ਪਨੀਰੀ ਵਿਕਰੀ ਲਈ ਉਪਲਬਧ ਹੈ। ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਜਾਂ ਘਰ ਦੇ ਬਗੀਚੇ ਲਈ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਖਰੀਦਣ ਦਾ ਇਹ ਚੰਗਾ ਮੌਕਾ ਹੈ!

PAU Vegetable Seedling Sale



  1. ਵੇਲਾਂ ਵਾਲੇ ਟਮਾਟਰ (Climbing Tomato):
    • ਕਿਸਮ: ਪੰਜਾਬ ਸਰਤਾਜ
    • ਮੁੱਲ: ₹200 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  2. ਚੈਰੀ ਟਮਾਟਰ (Cherry Tomato):
    • ਕਿਸਮ: ਪੰਜਾਬ ਕੇਸਰ ਚੈਰੀ
    • ਮੁੱਲ: ₹300 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  3. ਟਮਾਟਰ (Tomato):
    • ਕਿਸਮ: ਪੰਜਾਬ ਰੱਤਾ
    • ਮੁੱਲ: ₹200 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  4. ਮਿਰਚ (Chilli/Pepper):
    • ਕਿਸਮਾਂ: ਪੰਜਾਬ ਸੰਧੂਰੀ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਤੇਜ
    • ਮੁੱਲ: ₹200 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  5. ਦੋਗਲੀ ਮਿਰਚ (Hybrid Chilli/Pepper):
    • ਕਿਸਮ: ਸੀ ਐਚ 52 (CH 52)
    • ਮੁੱਲ: ₹300 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  6. ਬੈਂਗਣ (Brinjal/Eggplant) (ਛੋਟੇ ਗੋਲ - Chuchu Type):
    • ਕਿਸਮ: ਪੰਜਾਬ ਭਰਪੂਰ
    • ਮੁੱਲ: ₹200 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ
  7. ਬੈਂਗਣ (Brinjal/Eggplant) (ਲੰਬੇ ਟਾਈਪ - Long Type):
    • ਕਿਸਮ: ਪੰਜਾਬ ਰੌਣਕ
    • ਮੁੱਲ: ₹500 ਪ੍ਰਤੀ ਸੈਂਕੜਾ ਬੂਟਾ (ਪਲੱਗ ਟਰੇਅ ਵਿੱਚ)

ਸੰਪਰਕ ਅਤੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੋਟ: 📝

ਨਰਸਰੀ ਸੰਪਰਕ (ਆਮ):

ਵਧੇਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਤੇ ਖਰੀਦਦਾਰੀ ਲਈ, PAU ਮੁੱਖ ਐਕਸਚੇਂਜ ਨੰਬਰ 'ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਵਿਭਾਗ ਬਾਰੇ ਪੁੱਛੋ।

  • PAU ਮੁੱਖ ਐਕਸਚੇਂਜ: 0161-2401960

ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਬਾਰੇ ਨੋਟ:

ਜ਼ਰੂਰੀ ਸੂਚਨਾ: ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਿਰਫ਼ ਆਮ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਹੈ। ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਉਪਲਬਧਤਾ, ਮੁੱਲ ਅਤੇ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਲਈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸਿੱਧੇ PAU ਨਰਸਰੀ ਫਾਰਮ ਜਾਂ ਸਬਜ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ। ਅਸੀਂ (ਬਲੌਗ/ਪਬਲਿਸ਼ਰ) ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਬਦੀਲੀ ਜਾਂ ਵਿਕਰੀ ਸੰਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਚੀਜ਼ ਲਈ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਨਹੀਂ ਹੋਵਾਂਗੇ।

Monday, November 3, 2025

November 03, 2025

🌾 ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਕੇ ਕਣਕ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ: ਮਿੱਟੀ ਬਚਾਓ, ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਧਾਓ (PAU ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ਾਂ)

🌾 ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕਣਕ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ: ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ

Intro: ਸਮੱਸਿਆ + ਹੱਲ

ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਅੰਨਦਾਤੇ ਕਿਸਾਨ ਭਰਾਵੋ, ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪਈ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗ ਲਾਉਣਾ ਸਾਡੀ 'ਮਾਂ' ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ। ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੇ ਸਾਡੇ ਵਾਤਾਵਰਣ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸਿਹਤ ਨੂੰ ਗੰਭੀਰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਹੈ। ਅੱਗ ਲੱਗਣ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜੇ (ਮਾਈਕ੍ਰੋ-ਆਰਗੇਨਿਜ਼ਮ) ਮਰ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ₹2000-3000 ਦੀ ਖਾਦ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ (Nutrients) ਧੂੰਏਂ ਵਿੱਚ ਉੱਡ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।

ਪਰ ਹੁਣ ਚਿੰਤਾ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ! ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU) ਨੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਤਕਨੀਕਾਂ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨਾਂ (ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ) ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਸਾੜੇ, ਉਸਨੂੰ ਆਪਣੀ ਅਗਲੀ ਫ਼ਸਲ, ਕਣਕ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਕੁਦਰਤੀ ਖਾਦ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਸਹੀ ਗਿਆਨ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀਂ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਓਗੇ, ਬਲਕਿ ਆਪਣੀ ਧਰਤੀ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਦੇ ਫ਼ਰਜ਼ ਨੂੰ ਵੀ ਨਿਭਾਓਗੇ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀਂ ਵਾਤਾਵਰਣ-ਅਨੁਕੂਲ ਖੇਤੀ ਵੱਲ ਇੱਕ ਕਦਮ ਪੁੱਟੋਗੇ।

ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕਣਕ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ


😥 ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਪਰਾਲੀ ਨਾ ਸਾੜਣਾ? ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਦਾ ਫਰਜ਼!

ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਨ ਦੇ ਨੁਕਸਾਨ ਬੇਹੱਦ ਗੰਭੀਰ ਹਨ, ਜੋ ਸਾਡੀ ਖੇਤੀ ਅਤੇ ਵਾਤਾਵਰਣ ਦੀ ਜੜ੍ਹ ਨੂੰ ਖੋਖਲਾ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।

1. ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਮਰ ਜਾਣਾ (Soil Health Degradation)

  • ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਸਿਪਾਹੀਆਂ ਦੀ ਮੌਤ: ਅੱਗ ਦੀ ਗਰਮੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉੱਪਰਲੀ ਸਤ੍ਹਾ (Topsoil) ਦੇ ਤਾਪਮਾਨ ਨੂੰ ਅਚਾਨਕ ਬਹੁਤ ਵਧਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜੇ (ਮਾਈਕ੍ਰੋ-ਆਰਗੇਨਿਜ਼ਮ) ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਅਤੇ ਫੰਗਸ, ਜੋ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਕੁਦਰਤੀ ਤੌਰ 'ਤੇ ਉਪਜਾਊ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਇਹ 'ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਦੋਸਤ' ਫ਼ਸਲਾਂ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਉਪਲਬਧ ਕਰਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਜਦੋਂ ਅੱਗ ਲੱਗਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਸਾਰੇ ਸੂਖਮ ਜੀਵ ਮਰ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਕਾਰਨ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜੈਵਿਕ ਕਿਰਿਆ (Biological Activity) ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

  • ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸਖ਼ਤੀ: ਅੱਗ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕੁਦਰਤੀ ਬਣਤਰ (Soil Structure) ਟੁੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਸਖ਼ਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਸਖ਼ਤ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਜੜ੍ਹ ਦਾ ਵਾਧਾ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਹੋ ਪਾਉਂਦਾ।

2. ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤਾਂ ਦਾ ਵੱਡਾ ਨੁਕਸਾਨ (Nutrient Loss)

  • ਕੀਮਤੀ ਖਾਦ ਸਵਾਹ: ਕਿਸਾਨ ਵੀਰੋ, ਪਰਾਲੀ ਕੋਈ ਕੂੜਾ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਇੰਨੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ (Nutrients) ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿੰਨੇ ₹2000-3000 ਦੀ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖਾਦ ਵਿੱਚ। ਇਹ ਤੱਤ ਅਗਲੀ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਕੁਦਰਤੀ ਖਾਦ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ।

  • ਧੂੰਏਂ ਵਿੱਚ ਉੱਡਦੇ ਤੱਤ: ਪਰ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਦੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਇਹ ਸਾਰੇ ਕੀਮਤੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਸਲਫਰ, ਧੂੰਏਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਾਤਾਵਰਣ ਵਿੱਚ ਉੱਡ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ, ਸਾਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਹੀ ਤੱਤਾਂ ਲਈ ਬਾਜ਼ਾਰੋਂ ਮਹਿੰਗੀ ਖਾਦ ਖਰੀਦਣੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ। ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰਲਾਉਣ ਨਾਲ ਇਹ ਤੱਤ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਮਿਲਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਾਡੇ ਖਰਚੇ ਘੱਟ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।


🚜 ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਸਾਂਭਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਕੰਮ: ਆਧੁਨਿਕ ਹੱਲ

ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗ ਲਾਉਣ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਉਸਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਹੀ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਸੰਭਾਲਣ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU) ਨੇ ਕਈ ਅਤਿ-ਆਧੁਨਿਕ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਸਿਫਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਇਹ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਬਚਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸਿਹਤ ਸੁਧਾਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਮੁੱਖ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ:

ਮਸ਼ੀਨ ਦਾ ਨਾਮਮੁੱਖ ਕੰਮ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ
ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ (Happy Seeder)ਇਹ ਇੱਕ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਮਸ਼ੀਨ ਹੈ ਜੋ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਹਟਾਏ ਬਿਨਾਂ, ਉਸਦੇ ਉੱਪਰੋਂ ਲੰਘ ਕੇ, ਸਿੱਧਾ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਇਹ ਪਰਤ ਮਲਚ (Mulch) ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ।
ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ (Super Seeder)ਇਹ ਇੱਕੋ ਸਮੇਂ ਤਿੰਨ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ: ਇਹ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਕੱਟਦੀ ਹੈ, ਉਸਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾਉਂਦੀ ਹੈ, ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਹੀ ਡੂੰਘਾਈ 'ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵੀ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ।
ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ (Smart Seeder)ਇਹ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਵਰਗੀ ਇੱਕ ਹੋਰ ਉੱਨਤ ਮਸ਼ੀਨ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਈ ਅਤੇ ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਲਈ ਕੁਝ ਵੱਖਰੇ ਅਤੇ ਵਧੇਰੇ ਕੁਸ਼ਲ (Efficient) ਫੀਚਰ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ।
ਚੌਪਰ ਮਲਚਰ (Chopper Mulcher)ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਨਹੀਂ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ, ਤਾਂ ਇਹ ਮਸ਼ੀਨ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬਰਾਬਰ ਖਿਲਾਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਇਸਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ।
ਉਲਟਾਂਵਾਂ ਹਲ (MB Plough)ਇਹ ਹਲ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਵੀ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਬਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਜਿੱਥੇ ਇਹ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਗਲ-ਸੜ ਕੇ ਖਾਦ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੋਟ: ਇਨ੍ਹਾਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਅਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਵਰਤੋਂ ਲਈ, ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਵਾਲੇ ਦਾ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਿਪੁੰਨ (Skilled) ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਬੀਜ ਸਹੀ ਡੂੰਘਾਈ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਪਵੇ।

🧑‍🎓 ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਵਾਲੇ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਅਤੇ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ

ਆਧੁਨਿਕ ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਅਤੇ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਦੀ ਸਫਲਤਾ ਲਈ, ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਵਾਲੇ (ਆਪ੍ਰੇਟਰ) ਦਾ ਨਿਪੁੰਨ ਹੋਣਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਗਲਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਚਲਾਈ ਗਈ ਮਸ਼ੀਨ ਪੂਰੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਕਿ ਸਹੀ ਸਿਖਲਾਈ ਸਮਾਂ, ਈਂਧਨ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਬਚਾਉਂਦੀ ਹੈ।

⚠️ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ: ਗਲਤੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚੋ

ਗਲਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਨਾਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਨੁਕਸਾਨ:

  • ਜੇ ਬੀਜ ਸਹੀ ਡੂੰਘਾਈ 'ਤੇ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ, ਤਾਂ ਉੱਗਣ ਦੀ ਦਰ (Germination Rate) ਘੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ 'ਤੇ ਸਿੱਧਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।
  • ਗਲਤ ਐਡਜਸਟਮੈਂਟ ਕਾਰਨ ਮਸ਼ੀਨ ਦੇ ਮਹਿੰਗੇ ਪੁਰਜ਼ੇ ਟੁੱਟ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਵਾਧੂ ਮੁਰੰਮਤ ਦਾ ਖਰਚਾ ਝੱਲਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।

🛠️ ਸਿਖਲਾਈ ਬਾਰੇ ਵਿਸਤਾਰ: ਗਿਆਨ ਦੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ

ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਸ੍ਰੋਤ ਵਰਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ:

  • ਸਿਖਲਾਈ ਕੈਂਪ: ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU), ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿਖੇ ਅਤੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰਾਂ (KVKs) ਵਿੱਚ ਮੁਫਤ ਪ੍ਰੈਕਟੀਕਲ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
  • ਡਿਜੀਟਲ ਸ੍ਰੋਤ: PAU ਕਿਸਾਨ ਐਪ ਰਾਹੀਂ ਵੀ ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਬਾਰੇ ਆਨਲਾਈਨ ਸਿਖਲਾਈ ਲਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ।
  • ਸਿਖਲਾਈ ਦੇ ਮੁੱਖ ਨੁਕਤੇ: ਆਪ੍ਰੇਟਰ ਨੂੰ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਚਲਾਉਣਾ, ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਛੋਟੀਆਂ-ਮੋਟੀਆਂ ਮੁਰੰਮਤਾਂ ਕਰਨਾ, ਅਤੇ ਬੀਜ-ਖਾਦ ਦੀ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਡੂੰਘਾਈ ਸੈੱਟ ਕਰਨਾ ਸਿਖਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

🌱 ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਨੁਸਾਰ ਤਕਨੀਕਾਂ: ਸਹੀ ਚੋਣ

ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਸਾਂਭਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕਾ ਚੁਣਨਾ ਤੁਹਾਡੇ ਖੇਤ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ (Soil Type) 'ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਹਰ ਕਿਸਮ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ ਵੱਖਰੀ ਰਣਨੀਤੀ ਅਪਣਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਕਣਕ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਾ ਆਵੇ।

ਤੁਹਾਡੇ ਖੇਤ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਹੀ ਤਕਨੀਕ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰੋ:

ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ (Soil Type) ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਤਕਨੀਕ ਮੁੱਖ ਫਾਇਦੇ
ਦਰਮਿਆਨੀਆਂ ਤੋਂ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ (Heavy Soils) ਸਾਰੀਆਂ ਤਕਨੀਕਾਂ ਕਾਮਯਾਬ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਅਤੇ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਆਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਪਰਾਲੀ (Organic Matter) ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਗਲ-ਸੜ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖਾਦ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ (Light Soils) ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣਾ (In-Situ Incorporation) ਬੇਹਤਰ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ MB Plough (ਉਲਟਾਂਵਾਂ ਹਲ) ਵਰਗੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ। ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਬਣੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ, ਜੋ ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ (Fertility) ਵੱਧਦੀ ਹੈ।

ਨੋਟ: ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਲਚ ਕਰਨ ਦੀ ਬਜਾਏ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ ਨਾਲ ਰੇਤਲੇਪਣ ਦਾ ਅਸਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਢਾਂਚਾ (Structure) ਸੁਧਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।

🌾 ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਸਮੇਂਦਾਰੀ ਦਾ ਮਹੱਤਵ: ਸਮੇਂ ਦੀ ਚੋਣ

ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਕੇ ਕਣਕ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਕਦਮ ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਹੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸਦਾ ਸਿੱਧਾ ਅਸਰ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ 'ਤੇ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।

ਸਮੇਂ ਦੀ ਅਹਿਮੀਅਤ: ਛੋਟੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਲਾਭ

  • ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ: ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ PR 126 ਜਾਂ PR 127 ਵਰਗੀਆਂ ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ।
  • ਕਣਕ ਲਈ ਵਧੇਰੇ ਸਮਾਂ: ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਜਲਦੀ ਹੋ ਜਾਣ ਨਾਲ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਖੇਤ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨਾਂ (ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ) ਚਲਾਉਣ ਲਈ ਵਧੇਰੇ ਕੀਮਤੀ ਸਮਾਂ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਕਣਕ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
  • ਘੱਟ ਪਰਾਲੀ, ਆਸਾਨ ਪ੍ਰਬੰਧਨ: ਇਨ੍ਹਾਂ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵੀ ਮੁਕਾਬਲਤਨ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਘੱਟ ਪਰਾਲੀ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ/ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣਾ ਆਸਾਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਘੱਟ ਰੁਕਦੀਆਂ ਹਨ।

ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ: ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ

  • ਜਦੋਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਜਲਦੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਤਣੇ ਦੀ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਵਰਗੇ ਕੀੜਿਆਂ ਨੂੰ ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ ਪਨਪਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ। ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ, ਅਗਲੀ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ 'ਤੇ ਇਸ ਸੁੰਡੀ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਕਾਫ਼ੀ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਟਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅੰਤ ਤੱਕ ਹੋ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ ਇਨ੍ਹਾਂ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ।

ਸਹੀ ਸਮੇਂ 'ਤੇ ਸਹੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਕੇ, ਕਿਸਾਨ ਵੀਰ ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦੋਵਾਂ ਪੱਖੋਂ ਲਾਭ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ।

🏞️ ਕਣਕ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਤਿਆਰੀ

ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਸਾਂਭਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ (ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ) ਦੀ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਵਰਤੋਂ ਲਈ, ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਝੋਨੇ ਦੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਕੰਮ ਕਰਨੇ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਨ। ਇਹ ਤਿਆਰੀ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਕਾਰਗੁਜ਼ਾਰੀ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦੀ ਹੈ, ਬਲਕਿ ਫਸਲ ਦੀ ਸਿਹਤ ਨੂੰ ਵੀ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਂਦੀ ਹੈ।

💧 ਕਿਆਰੇ ਪਾਉਣਾ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ?

  • ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ: ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਿਆਰੇ (Beds) ਨਾ ਹੋਣ ਤਾਂ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਮੁਸ਼ਕਲ ਆਉਂਦੀ ਹੈ। ਪਾਣੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬਰਾਬਰ ਨਹੀਂ ਫੈਲਦਾ।
  • ਸਮੇਂ ਦੀ ਚੋਣ: ਇਸ ਲਈ, ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਦੋ ਕਿਆਰੇ ਜ਼ਰੂਰ ਪਾਓ। ਕਿਆਰੇ ਬਣਾਉਣ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਦੀ ਬੱਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਲੋੜ ਪੈਣ 'ਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਨਦੀਨ ਜਾਂ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਲਈ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਵੜਨਾ ਆਸਾਨ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
  • ਯਾਦ ਰੱਖੋ: ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਿਆਰੇ ਨਹੀਂ ਬਣਾਏ, ਤਾਂ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਹੋਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ।

🔎 ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜਿਆਂ ਦੀ ਨਿਗਰਾਨੀ

  • ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਜਾਂਚ: ਸਤੰਬਰ-ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਨਾਜ਼ੁਕ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਝੋਨੇ ਦੇ ਖੇਤਾਂ ਦੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਜਾਂਚ ਕਰਦੇ ਰਹੋ।
  • ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਖਤਰਾ: ਜੇ ਮੁੰਜਰਾਂ ਕੱਟਣ ਵਾਲੀ ਸੁੰਡੀ ਜਾਂ ਤਣੇ ਦੀ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਿਖੇ, ਤਾਂ ਤੁਰੰਤ PAU ਦੀਆਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ਾਂ ਮੁਤਾਬਿਕ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰੋ। ਇਹ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਕੀੜੇ ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ ਲੁਕ ਕੇ ਅਗਲੀ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੇ ਹਨ।

ਸੰਖੇਪ ਵਿੱਚ, ਸਹੀ ਤਿਆਰੀ ਇੱਕ ਸਿਹਤਮੰਦ ਅਤੇ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ ਦਾ ਆਧਾਰ ਹੈ।

⚙️ ਮਲਚਰ ਤੇ ਹੋਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਵਰਤੋਂ: ਸਮਝਦਾਰੀ ਨਾਲ ਕੰਮ

ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਸਹੀ ਕ੍ਰਮ ਅਤੇ ਤਕਨੀਕ ਅਪਣਾਉਣੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਈਂਧਨ ਅਤੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਬਚਤ ਹੋ ਸਕੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਰੁਕਾਵਟ ਨਾ ਆਵੇ।

ਮੁੱਖ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦਾ ਕਾਰਜਕ੍ਰਮ

  • ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ/ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਵਾਧੂ ਮਲਚਰ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ: ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਚੌਪਰ ਜਾਂ ਮਲਚਰ ਚਲਾਉਣ ਦੀ ਕੋਈ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ।
    • ਇਹ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਇੱਕੋ ਸਮੇਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਕੱਟਦੀਆਂ ਹਨ, ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਅਤੇ ਬਿਜਾਈ ਵੀ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਮਲਚਰ ਦੀ ਵਾਧੂ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਸਿਰਫ਼ ਸਮੇਂ ਦੀ ਬਰਬਾਦੀ ਅਤੇ ਡੀਜ਼ਲ ਦਾ ਵਾਧੂ ਖਰਚਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।
  • ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਮਲਚਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: ਜੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦਾ ਵੱਢ (Stubble) ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਰਾਲੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗਾੜ੍ਹੀ ਹੈ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ, ਤਾਂ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ।
    • ਮਲਚਰ ਵਰਤਣ ਤੋਂ ਗੁਰੇਜ਼ ਕਰੋ। ਜੇ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਛੋਟਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਉਸਨੂੰ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਚੁੱਕ ਕੇ ਮਲਚ (Mulch) ਨਹੀਂ ਕਰ ਪਾਉਂਦੀ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਬੀਜਾਈ ਵਿੱਚ ਮੁਸ਼ਕਲ ਆਉਂਦੀ ਹੈ।

ਪੁਰਾਣੀਆਂ/ਸਧਾਰਨ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ

ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਹੈਪੀ ਜਾਂ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਉਪਲਬਧ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਕ੍ਰਮ ਅਪਣਾਓ:

  1. ਕੱਟਣਾ: ਚੌਪਰ/ਮਲਚਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਖਿਲਾਰ ਦਿਓ।
  2. ਮਿਲਾਉਣਾ: ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਉਲਟਾਵੇਂ ਹੱਲ (MB Plough) ਜਾਂ ਰੋਟਾਵੇਟਰ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਦਿਓ।
  3. ਸਿੰਚਾਈ: ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਗਲਾਉਣ ਲਈ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ।

ਸਹੀ ਮਸ਼ੀਨ ਅਤੇ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਖਾਦ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਅਗਲੀ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।

🚜 ਸੀਡਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਵਿਸਤਾਰ ਨੁਕਤੇ: ਸਫਲਤਾ ਦੀ ਕੁੰਜੀ

ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਕੁਝ ਤਕਨੀਕੀ ਨੁਕਤਿਆਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਸੁਚਾਰੂ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰ ਸਕਣ।

ਸਹੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਗੱਲਾਂ

  • ਨਮੀ ਦਾ ਧਿਆਨ (ਤਰ ਵੱਤਰ): ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲੋੜੀਂਦੀ ਨਮੀ (ਤਰ ਵੱਤਰ) ਬਣੀ ਰਹਿਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਝੋਨੇ ਦਾ ਆਖਰੀ ਪਾਣੀ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਲਗਾਓ ਕਿ ਜ਼ਮੀਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੁੱਕੀ ਨਾ ਹੋਵੇ। ਸੁੱਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਬੀਜ ਨਹੀਂ ਉੱਗੇਗਾ।
  • ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ: ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨੂੰ 1.5 ਤੋਂ 2.0 ਇੰਚ ਡੂੰਘਾਈ 'ਤੇ ਹੀ ਪਾਓ। ਇਸ ਡੂੰਘਾਈ 'ਤੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਉੱਗਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਨਮੀ ਮਿਲਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪੰਛੀ ਵੀ ਬੀਜ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੇ।
  • ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਧਾਓ: ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ, ਆਮ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲੋਂ 5 kg/ਏਕੜ ਵੱਧ ਬੀਜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ (PBW 869 ਵਰਗੀਆਂ ਖਾਸ ਕਿਸਮਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ)। ਇਹ ਵਾਧਾ ਇਸ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਕਾਰਨ ਕੁਝ ਬੀਜ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਉੱਗ ਨਹੀਂ ਪਾਉਂਦੇ। ਬਾਕੀ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ PAU ਦੀਆਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ਾਂ ਜ਼ਰੂਰ ਪੜ੍ਹੋ।

ਮਸ਼ੀਨ ਅਤੇ ਕੀਟ ਪ੍ਰਬੰਧਨ

  • ਪਾਈਪਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ: ਬੀਜ ਅਤੇ ਖਾਦ ਵਾਲੀਆਂ ਪਾਈਪਾਂ ਅਕਸਰ ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਕਾਰਨ ਬੰਦ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਦੌਰਾਨ ਹਰ 2-3 ਘੰਟੇ ਬਾਅਦ ਸੋਟੀ ਨਾਲ ਹਿਲਾ-ਹਿਲਾ ਕੇ ਚੈੱਕ ਕਰਦੇ ਰਹੋ।
  • ਕੀਟਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ: ਜੇ ਪਿਛਲੀ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਸੀ, ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੀ ਕਰੋ, ਤਾਂ ਜੋ ਕੀਟਾਂ ਦਾ ਜੀਵਨ ਚੱਕਰ (Life Cycle) ਟੁੱਟ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰਹੇ।

💧 ਖਾਦ ਤੇ ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਬੰਧ: ਖਰਚਾ ਘਟਾਓ, ਝਾੜ ਵਧਾਓ

ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਖਾਦ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕਰਨਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਪਰਾਲੀ ਜਦੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਗਲਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਹ ਖਾਦ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖਾਦ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

🧪 ਖਾਦ ਪ੍ਰਬੰਧ: PAU ਦੀਆਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ਾਂ

  • DAP (ਡਾਈ-ਅਮੋਨੀਅਮ ਫਾਸਫੇਟ): ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ 65 kg/ਏਕੜ DAP ਪੋਰ (Pore) ਦਿਉ। ਇਹ ਫਾਸਫੋਰਸ, ਜੋ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਨੂੰ ਬੀਜ ਦੇ ਨੇੜੇ ਉਪਲਬਧ ਕਰਵਾਉਂਦਾ ਹੈ।
  • ਯੂਰੀਆ (ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ): 90 kg/ਏਕੜ ਯੂਰੀਆ ਨੂੰ ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਕਿਸਤਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡੋ (ਹਰੇਕ 45 kg)। ਇਹ ਕਿਸਤਾਂ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਛੱਟੇ ਨਾਲ ਪਾਉ। ਯਾਦ ਰੱਖੋ, ਪਰਾਲੀ ਕਾਰਨ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਵਾਧੂ ਲੋੜ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ।
  • ਖਾਸ ਨੁਕਤਾ (ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਲਈ): ਜੇ ਦੂਜਾ ਪਾਣੀ ਲੇਟ ਹੋਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਕਮੀ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ, 10% ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਘੋਲ ਬਣਾ ਕੇ ਦੋ ਛਿੜਕਾਅ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 42 ਅਤੇ 54 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਕਰੋ।

ਜੈਵਿਕ ਖਾਦ (Biofertilizer) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਾਰੇ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਇਹ ਲੇਖ ਪੜ੍ਹੋ

🚿 ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਬੰਧ: ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਤੇ ਮਾਤਰਾ

ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਉੱਪਰਲੀ ਪਰਤ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਨਮੀ ਨੂੰ ਬਣਾਈ ਰੱਖਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਘੱਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ ਪਹਿਲੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਸਮਾਂ (Happy/Smart Seeder)
ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ 25-30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ (ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਲਦੀ)
ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ 30-35 ਦਿਨ ਬਾਅਦ
  • ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ: ਪਾਣੀ ਹਮੇਸ਼ਾ ਹਲਕਾ ਲਗਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜ੍ਹਾ ਨਾ ਹੋਵੇ।
  • ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ: ਕਣਕ ਨੂੰ ਦਿਨ ਦੇ ਸਮੇਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਨੂੰ ਤਰਜੀਹ ਦੇਵੋ ਤਾਂਕਿ ਪਾਣੀ ਜਲਦੀ ਨਿਕਲ ਸਕੇ।

🐛 ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜਿਆਂ ਦੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਤੇ ਰੋਕਥਾਮ: ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ

ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ, ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਸਤ੍ਹਾ 'ਤੇ ਮਲਚ (ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਪਰਤ) ਹੋਣ ਕਾਰਨ, ਕੁਝ ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜੇ ਅਤੇ ਜਾਨਵਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਨਾਹ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਲਈ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਲਗਾਤਾਰ ਅਤੇ ਸਹੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਕਰਨਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਰੋਕਥਾਮ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕੇ।

ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਨਿਰੀਖਣ ਕਿਉਂ ਜ਼ਰੂਰੀ?

  • ਸਮੇਂ ਦੀ ਨਾਜ਼ੁਕਤਾ: ਨਵੰਬਰ ਅਤੇ ਦਸੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੌਰਾਨ, ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਕਣਕ ਦੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਖਾਸ ਤੌਰ 'ਤੇ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ, ਚੂਹਿਆਂ, ਅਤੇ ਫੰਗਸ ਕਾਰਨ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
  • ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ: ਜੇਕਰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲਾਂ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਸੀ, ਤਾਂ ਇਸਦੇ ਅੰਡੇ ਜਾਂ ਲਾਰਵੇ ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ ਛੁਪੇ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਣਕ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਉਣਗੇ। ਇਸ ਲਈ, ਲਗਾਤਾਰ ਨਿਰੀਖਣ ਕਰਕੇ ਤੁਰੰਤ PAU ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਮੁਤਾਬਕ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ।
  • ਚੂਹਿਆਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ: ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਚੂਹਿਆਂ ਨੂੰ ਲੁਕਣ ਅਤੇ ਰਹਿਣ ਲਈ ਇੱਕ ਆਦਰਸ਼ ਜਗ੍ਹਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਚੂਹੇ ਕਣਕ ਦੇ ਨਵੇਂ ਉੱਗੇ ਬੂਟਿਆਂ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਵੱਡਾ ਨੁਕਸਾਨ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਚੂਹਿਆਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਜ਼ਿੰਕ ਫ਼ਾਸਫ਼ਾਈਡ (Zinc Phosphide) ਜਾਂ ਹੋਰ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ੀ ਤਰੀਕਿਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ।

ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ

  • ਫੰਗਸ ਦਾ ਡਰ: ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਮੀ ਅਤੇ ਪਰਾਲੀ ਕਾਰਨ ਫ਼ਸਲ ਵਿੱਚ ਫੰਗਸ (Fungus) ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਸਹੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਨਾਲ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਲੱਛਣਾਂ ਨੂੰ ਪਛਾਣੋ ਅਤੇ ਢੁਕਵੀਂ ਫ਼ੰਗਸਨਾਸ਼ਕ (Fungicide) ਦਵਾਈ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ।

ਲਗਾਤਾਰ ਨਿਗਰਾਨੀ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣਾ ਹੀ ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰੱਖਣ ਦਾ ਇੱਕੋ-ਇੱਕ ਸਫਲ ਤਰੀਕਾ ਹੈ।

🌿 ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: ਨਦੀਨ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੀ ਰਣਨੀਤੀ

ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨ (Weeds) ਇੱਕ ਵੱਡੀ ਚੁਣੌਤੀ ਪੇਸ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਜਦੋਂ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸਤ੍ਹਾ 'ਤੇ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਮੌਜੂਦ ਹੋਵੇ। ਇਸ ਲਈ, ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਚੋਣ ਅਤੇ ਸਹੀ ਸਮੇਂ 'ਤੇ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਨਾ ਪਹੁੰਚੇ ਅਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਸਹੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਹੋ ਸਕੇ।

ਮਸ਼ੀਨ ਅਨੁਸਾਰ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ

  • ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ/ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਨਾਲ: ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵਾਲੇ (Pre-plant) ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਾਲੇ (Post-emergence) ਦੋਵੇਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
    • ਕਾਰਨ: ਇਹ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਜਾਂ ਤਾਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਲਚ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦਾ ਅਸਰ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
  • ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਨਾਲ: ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵਾਲੇ (Post-emergence) ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਹੀ ਵਰਤਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ।
    • ਸਾਵਧਾਨੀ: ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵਾਲੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ, PAU ਵੱਲੋਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੇ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਕਣਕ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਾ ਪਹੁੰਚੇ। ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਦੇ ਘੋਲ ਨੂੰ ਬਰਾਬਰ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖਿਲਾਰਨ ਲਈ ਫਲੈਟ ਫੈਨ ਨੋਜ਼ਲ (Flat Fan Nozzle) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ।

ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਨੁਕਤੇ

  • ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ: ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ (ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ 100 ਤੋਂ 150 ਲੀਟਰ) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਜਦੋਂ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਮੌਜੂਦ ਹੋਵੇ।
  • ਦੋਹਰੀ ਸਮੱਸਿਆ: ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਪੱਤੇ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਦੋਹਰੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਲਈ ਸੰਯੁਕਤ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ (Combination Herbicides) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਦੀ ਲੋੜ ਪੈ ਸਕਦੀ ਹੈ।
Tuhadi farmaish anusaar, 'ਹੋਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਮਿਲਾਉਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ' ਵਾਲੇ ਭਾਗ ਨੂੰ 250 ਸ਼ਬਦਾਂ ਦੇ ਕਰੀਬ ਵਿਸਥਾਰ ਦੇ ਕੇ, ਸਹੀ HTML ਫਾਰਮੈਟ ਵਿੱਚ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ:

🔄 ਹੋਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਮਿਲਾਉਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ: ਜੇ ਸੀਡਰ ਨਾ ਹੋਵੇ

ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ ਵਰਗੀਆਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਬਿਜਾਈ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਉਪਲਬਧ ਨਹੀਂ ਹਨ, ਤਾਂ ਵੀ ਤੁਸੀਂ ਰਵਾਇਤੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸਫਲਤਾਪੂਰਵਕ ਮਿਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਖਾਦ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ 'In-Situ Incorporation' ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

ਰਵਾਇਤੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ

ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ ਲਈ ਇਹ ਕਦਮ ਚੁੱਕੋ:

  1. ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਕੱਟਣਾ (Chopping): ਕੰਬਾਇਨ ਨਾਲ ਕੱਟੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਵੱਢ (Stubble) ਨੂੰ ਪਹਿਲਾਂ ਚੌਪਰ/ਮਲਚਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੱਟ ਲਓ ਅਤੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬਰਾਬਰ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ। ਛੋਟੇ ਟੁਕੜੇ ਜਲਦੀ ਗਲਦੇ ਹਨ।
  2. ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾਉਣਾ (Incorporation): ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਹੀ ਨਮੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਲਟਾਂਵਾਂ ਹਲ (MB Plough) ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਬਾ ਦਿਓ। MB Plough ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਉਲਟਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਚਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
  3. ਮਿਲਾਉਣਾ (Mixing): MB Plough ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਾਂ ਸਿੱਧਾ, ਤਵੀਆਂ (Disc Harrow) ਜਾਂ ਰੋਟਾਵੇਟਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਦਿਓ। ਇਹ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਗਲਣ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਕਰਦੀ ਹੈ।
  4. ਸਿੰਚਾਈ (Irrigation for Decomposition): ਜੇ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵਿੱਚ ਸਮਾਂ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਗਲਾਉਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰ ਦਿਓ। ਪਾਣੀ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਸੂਖਮ ਜੀਵ (Micro-organisms) ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ।

ਇਨ੍ਹਾਂ ਤਰੀਕਿਆਂ ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਨੂੰ ਸਾੜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ।

✨ ਸਾਰਾਂਸ਼ – ਸਹੀ ਤਕਨੀਕ ਨਾਲ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ

ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਭਰਾਵੋ, ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗ ਲਾਉਣਾ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਕਦਮ ਹੈ, ਜਿਸਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਸਾਡੀਆਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਭੁਗਤਣਾ ਪਵੇਗਾ। ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗ ਲਾਉਣ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਉਸਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਾਂਭਣਾ ਹੁਣ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਵਾਤਾਵਰਣ ਲਈ, ਬਲਕਿ ਤੁਹਾਡੀ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਖੇਤੀ ਦੇ ਖਰਚੇ ਘਟਾਉਣ ਲਈ ਵੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਸਹੀ ਮਸ਼ੀਨਾਂ (ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ), ਸਹੀ ਤਕਨੀਕ ਅਤੇ ਸਹੀ ਸਮੇਂ 'ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਦੋਵੇਂ ਜਿੱਤ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।

ਮੁੱਖ ਨੁਕਤੇ ਜੋ ਯਾਦ ਰੱਖਣੇ ਹਨ:

  • ਮਿੱਟੀ ਬਚਾਓ: ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ₹2000-3000 ਦੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਬਚਾਓ।
  • ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਬਿਜਾਈ: ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀਆਂ ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ (PR 126, PR 127) ਦੀ ਚੋਣ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਾਂ ਮਿਲ ਸਕੇ।
  • ਸਹੀ ਮਸ਼ੀਨ: ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਨੁਸਾਰ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰੋ ਅਤੇ ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਲਈ PAU ਕਿਸਾਨ ਐਪ ਜਾਂ KVKs ਤੋਂ ਸਿਖਲਾਈ ਜ਼ਰੂਰ ਲਓ।
  • ਖਾਦ ਪ੍ਰਬੰਧਨ: ਯੂਰੀਆ ਦੀਆਂ ਕਿਸਤਾਂ ਅਤੇ DAP ਦੀ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ।

ਅੰਤ ਵਿੱਚ, ਯਾਦ ਰੱਖੋ: ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਨਾ ਮਤਲਬ ਆਪਣੀ ਮਾਂ ਧਰਤੀ ਨੂੰ ਜਲਾਉਣਾ ਹੈ। ਆਓ, ਸਾਰੇ ਮਿਲ ਕੇ ਇਸ ਸਮੱਸਿਆ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰੀਏ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਹਰਾ-ਭਰਾ ਬਣਾਈਏ।

Tuhadi farmaish anusaar, 'ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ' ਦੇ ਵਿਸ਼ੇ 'ਤੇ ਆਮ ਪੁੱਛੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਸਵਾਲਾਂ (FAQs) ਨੂੰ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ 20 ਤੋਂ ਵੱਧ ਸਵਾਲਾਂ ਵਿੱਚ HTML ਫਾਰਮੈਟ ਵਿੱਚ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਜ਼ਰੂਰੀ internal links ਅਤੇ Keywords ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ:

❓ FAQs – ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਆਮ ਸਵਾਲ (ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਕਣਕ)

ਕਿਸਾਨ ਵੀਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਬਾਰੇ ਅਕਸਰ ਪੁੱਛੇ ਜਾਂਦੇ ਸਵਾਲ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹਨ:

  1. ਸਵਾਲ: ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਨ ਦਾ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸਿਹਤ 'ਤੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਨੁਕਸਾਨ ਕੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਅੱਗ ਲੱਗਣ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਲੱਖਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਮਾਈਕ੍ਰੋ-ਆਰਗੇਨਿਜ਼ਮ ਮਰ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜੈਵਿਕ ਕਿਰਿਆ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਸਖ਼ਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
  2. ਸਵਾਲ: ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ (Nutrients) ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ?
    • ਜਵਾਬ: ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ ₹2000-3000 ਦੀ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖਾਦ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਕੀਮਤੀ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ (ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, ਫਾਸਫੋਰਸ, ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਸਲਫਰ) ਹੁੰਦੇ ਹਨ।
  3. ਸਵਾਲ: ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਲਈ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਤਿੰਨ ਮੁੱਖ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਹਨ?
    • ਜਵਾਬ: ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ (Happy Seeder), ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ (Super Seeder), ਅਤੇ ਸਮਾਰਟ ਸੀਡਰ (Smart Seeder)।
  4. ਸਵਾਲ: ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਅਤੇ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਵਿੱਚ ਕੀ ਮੁੱਖ ਫਰਕ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਹਟਾਏ ਬਿਨਾਂ ਮਲਚਿੰਗ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਕੱਟਦੀ ਹੈ, ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਬਿਜਾਈ ਵੀ ਕਰਦੀ ਹੈ।
  5. ਸਵਾਲ: ਕੀ ਮਲਚਰ ਚਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਚਲਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਨਹੀਂ। ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਵਰਤ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਮਲਚਰ ਨਾ ਵਰਤੋ। ਮਲਚਰ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਛੋਟਾ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਉਸਨੂੰ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਲਚ ਨਹੀਂ ਕਰ ਪਾਉਂਦੀ।
  6. ਸਵਾਲ: ਕਣਕ ਬੀਜਣ ਲਈ ਸਹੀ ਡੂੰਘਾਈ ਕਿੰਨੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: 1.5 ਤੋਂ 2.0 ਇੰਚ ਡੂੰਘਾਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਲ ਬੀਜ ਨੂੰ ਸਹੀ ਨਮੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ।
  7. ਸਵਾਲ: ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਕਿੰਨੀ ਵਧਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ 5 kg/ਏਕੜ ਵੱਧ ਬੀਜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ, ਕਿਉਂਕਿ ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਕਾਰਨ ਕੁਝ ਬੀਜ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਉੱਗ ਨਹੀਂ ਪਾਉਂਦੇ। ਹੋਰ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ PAU ਦੀਆਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ਾਂ ਜ਼ਰੂਰ ਪੜ੍ਹੋ।
  8. ਸਵਾਲ: ਨਵੀਂ ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਲਈ ਸਿਖਲਾਈ ਕਿੱਥੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU), ਲੁਧਿਆਣਾ ਜਾਂ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰਾਂ (KVKs) ਤੋਂ ਮੁਫਤ ਪ੍ਰੈਕਟੀਕਲ ਸਿਖਲਾਈ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਹੈ। PAU ਕਿਸਾਨ ਐਪ ਵੀ ਮਦਦਗਾਰ ਹੈ।
  9. ਸਵਾਲ: ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਤਕਨੀਕ ਕੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਰੀਆਂ ਤਕਨੀਕਾਂ (ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ) ਕਾਮਯਾਬ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰਾਲੀ ਜਲਦੀ ਗਲ-ਸੜ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
  10. ਸਵਾਲ: ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਲਈ ਕੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਜਾਂ MB Plough ਨਾਲ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣਾ (Incorporation) ਬੇਹਤਰ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਨਮੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਬਣੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ।
  11. ਸਵਾਲ: ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਕਦੋਂ ਲਗਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਹਲਕੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ 25-30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ, ਅਤੇ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ 30-35 ਦਿਨ ਬਾਅਦ। ਪਾਣੀ ਹਲਕਾ ਲਗਾਓ।
  12. ਸਵਾਲ: ਕਣਕ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਕਿੰਨੀ DAP ਖਾਦ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ 65 kg/ਏਕੜ DAP ਪੋਰ (Pore) ਦਿਉ।
  13. ਸਵਾਲ: ਕੀ ਪਰਾਲੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕਣਕ ਦੀ ਫਸਲ 'ਤੇ ਕੀੜਿਆਂ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਹਾਂ। ਪਰਾਲੀ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਕਾਰਨ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਚੂਹਿਆਂ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਲਗਾਤਾਰ ਨਿਗਰਾਨੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ।
  14. ਸਵਾਲ: ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਕਿਹੜੀ ਨੋਜ਼ਲ ਵਰਤਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨ ਲਈ ਫਲੈਟ ਫੈਨ ਨੋਜ਼ਲ (Flat Fan Nozzle) ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਪਰੇਅ ਬਰਾਬਰ ਹੋਵੇ।
  15. ਸਵਾਲ: ਕਣਕ ਬੀਜਣ ਲਈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਿਹੜੀ ਕਿਸਮ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: PR 126 ਜਾਂ PR 127 ਵਰਗੀਆਂ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹਨ, ਜੋ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵਧੇਰੇ ਸਮਾਂ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ।
  16. ਸਵਾਲ: ਕੀ ਮੈਂ ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਵਰਤ ਕੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਵਰਤ ਸਕਦਾ ਹਾਂ?
    • ਜਵਾਬ: ਹਾਂ, ਸੁਪਰ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਾਲੇ ਦੋਵੇਂ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ।
  17. ਸਵਾਲ: ਗਲਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਮਸ਼ੀਨ ਚਲਾਉਣ ਦੇ ਦੋ ਮੁੱਖ ਨੁਕਸਾਨ ਕੀ ਹਨ?
    • ਜਵਾਬ: ਪਹਿਲਾ, ਬੀਜ ਸਹੀ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਦੂਜਾ, ਮਸ਼ੀਨ ਖਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੁਰੰਮਤ ਦਾ ਖਰਚਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
  18. ਸਵਾਲ: ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕੀ ਤਿਆਰੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਸਹੀ ਕਰਨ ਲਈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਿਆਰੇ (Beds) ਜ਼ਰੂਰ ਪਾਓ।
  19. ਸਵਾਲ: ਯੂਰੀਆ ਦੀਆਂ ਕਿਸਤਾਂ ਕਦੋਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ?
    • ਜਵਾਬ: ਯੂਰੀਆ ਦੀਆਂ ਦੋ ਕਿਸਤਾਂ – ਪਹਿਲੀ ਪਹਿਲੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਛੱਟੇ ਨਾਲ ਪਾਉ।
  20. ਸਵਾਲ: ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਗਲਾਉਣ ਲਈ ਕੀ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ?
    • ਜਵਾਬ: ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਛੋਟੇ ਟੁਕੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੱਟ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ (Irrigation) ਦਿਓ। ਪਾਣੀ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਵਿੱਚ ਸੂਖਮ ਜੀਵ ਜਲਦੀ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ।
  21. ਸਵਾਲ: ਕੀ ਸਰਕਾਰ ਪਰਾਲੀ ਸੰਭਾਲ ਮਸ਼ੀਨਾਂ 'ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੰਦੀ ਹੈ?

Emotional Note: ਅਸੀਂ ਇਹ ਲੇਖ ਕਿਸਾਨ ਭਰਾਵਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਲਈ ਲਿਖਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਵਿਗਿਆਨਕ ਤਰੀਕਿਆਂ ਨਾਲ ਵਾਤਾਵਰਣ-ਅਨੁਕੂਲ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਣ। ਹਰ ਖੇਤ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਤੇ ਹਾਲਾਤ ਵੱਖਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਇਸ ਲਈ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰੀਕੇ ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਪਣੇ ਨੇੜਲੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਜਾਂ PAU ਵਿਗਿਆਨੀ ਨਾਲ ਸਲਾਹ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ। ਅਸੀਂ ਸਿਰਫ਼ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੇ ਹਾਂ — ਨਤੀਜਾ ਮੌਸਮ, ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਪ੍ਰਬੰਧ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ।

🌾 ਸਾਡੇ ਲੇਖ ਸਿਰਫ਼ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਭਲਾਈ ਲਈ ਹਨ — ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ PAU Ludhiana ਜਾਂ ਸੰਬੰਧਤ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ। 🌾

Friday, October 31, 2025

October 31, 2025

ਖੇਤੀ ਦੇ ਹਾਦਸਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਅਤੇ ਮੁਆਵਜ਼ਾ | ਪੰਜਾਬ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਸਕੀਮ | ਕਿਸਾਨ ਗਾਈਡ

ਖੇਤੀ ਦੌਰਾਨ ਵਾਪਰਨ ਵਾਲੇ ਹਾਦਸੇ ਅਤੇ ਬਚਾਅ

ੳ. ਸਪਰੇਅ ਦੌਰਾਨ ਹਾਦਸੇ ਤੋਂ ਬਚਾਓ ਦੇ ਮੁੱਢਲੇ ਢੰਗ
ਜੇ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਵਾਈਆਂ ਦਾ ਜ਼ਹਿਰ ਚੜ੍ਹ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਜਲਦੀ ਹੀ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਬੁਲਾਅ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਡਾਕਟਰ ਦੇ ਪੁੱਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੁੱਢਲੇ ਬਚਾਓ ਦੇ ਢੰਗ ਅਪਣਾਅ ਲੈਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ।

  • ਨਿਗਲੀ ਹੋਈ ਜ਼ਹਿਰ: ਜਲਦੀ ਹੀ ਉਲਟੀ ਕਰਾ ਕੇ ਮਰੀਜ਼ ਦੇ ਪੇਟ ਵਿੱਚੋਂ ਜ਼ਹਿਰ ਕੱਢ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਇਕ ਚਮਚ (15 ਗ੍ਰਾਮ) ਨਮਕ ਗਰਮ ਪਾਣੀ ਦੇ ਗਲਾਸ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਮਰੀਜ ਨੂੰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਹ ਅਮਲ, ਉਸ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਦੁਹਰਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਜਿੰਨਾ ਚਿਰ ਤੱਕ ਕਿ ਉਲਟੀ ਨਾ ਹੋ ਜਾਵੇ। ਸਹਿਜੇ ਸਹਿਜੇ ਉਂਗਲੀ ਨਾਲ ਗਲ ਨੂੰ ਟੋਹਣ ਜਾਂ ਚਮਚੇ ਦਾ ਖੁੰਢਾ ਪਾਸਾ ਗਲ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣ ਨਾਲ ਜਦੋਂ ਪੇਟ ਨਮਕੀਨ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰਿਆ ਹੋਵੇ ਉਲਟੀ ਕਰਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਮਿਲਦੀ ਹੈ। ਜੋ ਮਰੀਜ ਪਹਿਲੇ ਹੀ ਉਲਟੀਆਂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਨਮਕ ਨਾ ਦਿਓ। ਜੇ ਮਰੀਜ ਬੇਸੁਰਤ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਲਟੀਆਂ ਨਾ ਕਰਵਾਉ।

  • ਸਾਹ ਰਾਹੀਂ ਅੰਦਰ ਗਿਆ ਜ਼ਹਿਰ: ਮਰੀਜ ਨੂੰ ਜਲਦੀ ਹੀ ਖੁੱਲੀ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਲੈ ਜਾਓ (ਤੋਰ ਕੇ ਨਹੀਂ)। ਸਾਰੇ ਦਰਵਾਜੇ ਅਤੇ ਖਿੜਠੀਆਂ ਖੋਲ੍ਹ ਦਿਓ। ਪਾਏ ਤੰਗ ਕੱਪੜੇ ਢਿੱਲੇ ਕਰ ਦਿਓ। ਜੇ ਸਾਹ ਬੰਦ ਹੋ ਜਾਵੇ ਜਾਂ ਸਾਹ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਆਰਜੀ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਹ ਦਿਵਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਛਾਤੀ ਤੇ ਕੋਈ ਦਬਾਅ ਨਹੀਂ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਸਰਦੀ ਨਹੀਂ ਲੱਗਣ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ। ਮਰੀਜ਼ ਉੱਤੇ ਕੰਬਲ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਜਿੰਨਾ ਹੋ ਸਕੇ ਚੁੱਪ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਜੇ ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਕੜਵੱਲ ਪੈਣ ਤਾਂ ਉਸਨੂੰ ਹਨ੍ਹੇਰੇ ਕਮਰੇ ਵਿੱਚ ਬਿਸਤਰ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ। ਉਥੇ ਕੋਈ ਸ਼ੋਰ-ਸ਼ਰਾਬਾ ਨਾ ਕਰੋ। ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਅਲਕੋਹਲ ਨਾ ਦਿਉ।

  • ਚਮੜੀ ਰਾਹੀਂ ਜ਼ਹਿਰ ਜਾਣਾ: ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰ ਲਓ (ਸ਼ਾਵਰ, ਹੌਜ਼ ਜਾਂ ਪੰਪ ਦੁਆਰਾ)। ਕੱਪੜੇ ਉਤਾਰ ਕੇ ਸਰੀਰ ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਪਾਉਂਦੇ ਜਾਓ। ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਸਾਬਣ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਾਫ਼ ਕਰੋ। ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਛੇਤੀ ਧੋ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਕਾਵੀ ਫ਼ਰਕ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

  • ਅੱਖ ਵਿੱਚ ਜ਼ਹਿਰੀਲੀ ਦਵਾਈ ਪੈ ਜਾਣ ਤੇ: ਅੱਖਾਂ ਦੀਆ ਪਲਕਾਂ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਰੱਖੋ। ਚਲਦੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਤੁਰੰਤ ਹੀ ਅੱਖਾਂ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਸਹਿਜੇ ਸਹਿਜੇ ਧੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ। ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਧੋਦੇਂ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਕਿ ਡਾਕਟਰ ਨਾ ਪਹੁੰਚ ਜਾਵੇ। ਕਿਸੇ ਦਵਾਈ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਲਾਹ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਗਲਤ ਵਰਤੀ ਦਵਾਈ ਹੋਰ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਸਿੱਧ ਹੋਵੇ।

ਅ. ਸੱਪ ਦਾ ਡੱਸਣਾ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੱਪ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ, ਉਥੇ ਪਜਾਮਾਂ ਜਾਂ ਪੈਂਟ ਆਦਿ, ਉੱਚੇ ਬੂਟ, ਜੁਰਾਬਾਂ ਅਤੇ ਦਸਤਾਨੇ ਪਾ ਕੇ ਰੱਖੋ। ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਤੁਰਦਿਆਂ ਹੋਇਆਂ ਹੇਠਾਂ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ।

  • ਮੁੱਢਲੀ ਸਹਾਇਤਾ: ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਆਰਾਮ ਦਿਉ, ਤਾਂ ਕਿ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਜ਼ਹਿਰ ਨਾ ਫੈਲੇ। ਕੱਟੇ ਹੋਏ ਥਾਂ ਤੋਂ ਕੁਝ ਉੱਚਾ ਰੱਖ ਕੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ ਘੁੱਟ ਕੇ ਬੰਨ੍ਹ ਦਿਉ ਅਤੇ ਤੁਰੰਤ ਡਾਕਟਰ ਕੋਲ ਪਹੁੰਚਾਉ।

ੲ. ਮੱਧੂ ਮੱਖੀ ਜਾਂ ਭੂੰਡ ਦਾ ਕੱਟਣਾ
ਡੰਗ ਵਾਲੀ ਥਾਂ ਤੇ ਬਰਫ਼ ਨਾਲ ਠੰਢਾ ਕਰੋ। ਡੰਗ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦਿਓ। ਡੰਗ ਵਾਲੀ ਥਾਂ ਨੂੰ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋਵੋ। ਕੋਈ ਵੀ ਐਂਟੀਅਲਰਜੀ ਦਵਾਈ ਲਵੋ। ਤਿੱਖੇ ਰੰਗਾਂ ਵਾਲੇ ਕੱਪੜੇ ਅਤੇ ਸੁਗੰਧੀ ਵਾਲੀ ਚੀਜ਼ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪ੍ਰਹੇਜ ਕਰੋ। ਕਈ ਮਨੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਇਕ ਡੰਗ ਲੱਗਣ ਨਾਲ ਕਾਫ਼ੀ ਅਸਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਹਾਲਤ ਵਿੱਚ ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਡਾਕਟਰ ਕੋਲ ਲੈ ਜਾਓ।

ਸ. ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਕਰੰਟ ਲੱਗਣਾ
ਬਿਜਲੀ ਨਾਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਹਾਦਸਿਆਂ ਬਾਰੇ ਹਰੇਕ ਨੂੰ ਸੁਚੇਤ ਕਰੋ। ਬਿਜਲੀ ਨਾਲ ਚੱਲਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮੋਟਰਾਂ, ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਆਦਿ ਦੀਆਂ ਤਾਰਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਢੱਠੀਆਂ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ। ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਰਬੜ ਦੇ ਦਸਤਾਨੇ ਅਤੇ ਸੁੱਠੀ ਜੁੱਤੀ ਪਹਿਨੋ।

  • ਹਾਦਸਾ ਹੋਣ ਤੇ ਮੁੱਢਲੀ ਸਹਾਇਤਾ: ਜੇਕਰ ਸੰਭਵ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਤੁਰੰਤ ਬਿਜਲੀ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਉ। ਮਰੀਜ਼ ਨੂੰ ਹੱਥ ਲਾਏ ਬਿਨਾਂ ਤਾਰ ਤੋਂ ਪਾਸੇ ਕਰ ਦਿਉ। ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ ਰਬੜ ਦੀ ਸ਼ੀਟ, ਚਮੜੇ ਦੀ ਪੇਟੀ, ਲੱਕੜੀ ਜਾਂ ਕੋਈ ਹੋਰ ਚੀਜ਼ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਨਾ ਲੰਘ ਸਕੇ ਆਦਿ ਵਰਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਮਰੀਜ਼ ਦਾ ਸਾਹ ਬੰਦ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਉਸਨੂੰ ਮੂੰਹ ਨਾਲ ਸਾਹ ਦਿਉ। ਜੇਕਰ ਮਰੀਜ਼ ਦੀ ਨਬਜ਼ ਨਾ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਉਸ ਦੀ ਛਾਤੀ ਦੇ ਖੱਬੇ ਪਾਸੇ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਹਸਪਤਾਲ ਪਹੁੰਚਾਉ। ਕਰੰਟ ਲੱਗਣ ਨਾਲ ਜੇਕਰ ਜਖ਼ਮ ਹੋ ਗਏ ਹੋਣ, ਤਾਂ ਉਸ ਦਾ ਇਲਾਜ ਕਰਵਾਉ।

ਹ. ਥਰੈਸ਼ਰ ਦੇ ਹਾਦਸਿਆਂ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਦਾਇਤਾਂ:

  • ਥਰੈਸ਼ਰਾਂ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਦਿਆਂ ਖੁਲ੍ਹੇ ਕੱਪੜੇ, ਕੜਾ, ਘੜੀ ਆਦਿ ਨਾ ਪਾਓ।

  • ਨਸ਼ਾ ਖਾ/ਪੀ ਕੇ ਥਰੈਸ਼ਰ ਦਾ ਕੰਮ ਨਾ ਕਰੋ।

  • ਸੁਰੱਖਿਅਤਾ ਪਰਨਾਲੇ ਦੀ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਲੰਬਾਈ 90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 45 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਤੱਕ ਢਕਿਆ ਹੋਵੇ। ਇਸ ਦੀ ਢਾਲ ਦਾ ਅਗਿਉਂ 5 ਡਿਗਰੀ ਕੋਣ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ।

  • ਇਕ ਆਦਮੀ ਨੂੰ ਥਰੈਸ਼ਰ ਤੇ 10 ਘੰਟੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ।

  • ਕੰਮ ਕਰਦਿਆਂ ਗੱਲਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਰੁੱਝੋ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਪਾਸੇ ਧਿਆਨ ਕਰੋ।

  • ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਨੂੰ ਥਰੈਸ਼ਰ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਸੰਕੋਚ ਕਰੋ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਿੱਲ੍ਹੀ ਫ਼ਸਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਅੱਗ ਲੱਗਣ ਦਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਛੋਟੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਰੁੱਗ ਲਗਾਉਣ ਸਮੇਂ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ।

  • ਟਰੈਕਟਰ ਦੇ ਧੂੰਏ ਵਾਲਾ ਪਾਈਪ ਸਿੱਧਾ ਉੱਪਰ ਨੂੰ ਰੱਖੋ।

  • ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਮੋਟਰ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਸਵਿੱਚ ਕੰਮ ਵਾਲੇ ਦੇ ਨੇੜੇ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਸੰਕਟ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵਿੱਚ ਮੋਟਰ ਤੁਰੰਤ ਬੰਦ ਹੋ ਸਕੇ।

  • ਪਟੇ ਦੇ ਉੱਪਰੋਂ ਜਾਂ ਨੇੜੇ ਦੀ ਨਾ ਲੰਘੋ।

  • ਮਲਮ-ਪੱਟੀ ਆਦਿ ਦਾ ਸਮਾਨ ਕੋਲ ਰੱਖੋ।

  • ਥਰੈਸ਼ਰ ਨੂੰ ਬਿਜਲੀ ਦੀਆਂ ਤਾਰਾਂ ਆਦਿ ਤੋਂ ਦੂਰ ਫਿੱਟ ਕਰੋ।

ਕ. ਟਰੈਕਟਰ ਟਰਾਲੀ ਚਲਾਉਂਦੇ ਸਮੇਂ ਹਾਦਸੇ ਰੋਕਣ ਲਈ ਹਦਾਇਤਾਂ

  • ਡਰਾਈਵਰ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਢਾਂਚੇ (ROPS - Roll Over Protection Structure) ਵਾਲਾ ਟਰੈਕਟਰ ਹੀ ਖਰੀਦੋ।

  • ਟਰੈਕਟਰਾਂ ਤੇ ਟਰਾਲੀਆਂ ਪਿਛੇ ਤਿਕੋਨਾ ਰਿਫਲੈਕਟਰ ਲਗਵਾਓ।

  • ਤੂੜੀ ਜਾਂ ਕਪਾਹ ਦੀਆਂ ਛਿਟੀਆਂ ਦੀ ਢੋਆ-ਢੁਆਈ ਸਮੇਂ ਟਰਾਲੀ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੋੜਾਈ ਵਿੱਚ ਨਾ ਲੱਦੋ ਤੇ ਉਚੇਚੇ ਤੌਰ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਰੋ।

  • ਟਰੈਕਟਰ ਨੂੰ ਟਰਾਲੀ ਦੇ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਵਾਸਤੇ ਅਗਲੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ ਭਾਰਾ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿ ਟਰੈਕਟਰ ਪਿਛੇ ਨੂੰ ਪਲਟਾ ਨਾ ਖਾਵੇ।

  • ਟਰੈਕਟਰ-ਟਰਾਲੀ ਨਾਲ ਉੱਚਾ ਪੁੱਲ ਲੰਘਦੇ ਹੋਏ ਵਿਚਾਲੇ ਗਿਅਰ ਨਾ ਬਦਲੋ।

  • ਰੇਲ ਲਾਈਨ ਪਾਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਸੱਜੇ-ਖੱਬੇ ਜ਼ਰੂਰ ਵੇਖੋ।

ਖ. ਪੱਠੇ ਕੁਤਰਦੇ ਸਮੇਂ ਹਾਦਸੇ ਰੋਕਣ ਲਈ ਹਦਾਇਤਾਂ

  • ਪੱਠੇ ਕੁਤਰਣ ਵਾਲਾ ਉਹ ਟੋਕਾ ਖਰੀਦੋ ਜਿਸਦੇ ਵੱਡੇ ਚੱਕਰ ਦੀ ਕੁੰਡੀ ਲੱਗੀ ਹੋਵੇ, ਟੋਕੇ ਦਾ ਵੱਡਾ ਚੱਕਰ, ਗਿਅਰ ਬਾਕਸ, ਸ਼ਾਫ਼ਟ, ਪੁਲੀਆਂ ਅਤੇ ਪਟੇ ਢਕੇ ਹੋਏ ਹੋਣ ਅਤੇ ਵਾਰਨਿੰਗ ਰੋਲਰ ਲੱਗਾ ਹੋਵੇ।

  • ਰੁੱਗ ਲਾਉਣ ਵਾਲਾ ਪ੍ਰਨਾਲਾ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਲੰਬਾ ਅਤੇ ਉਤਲੇ ਪਾਸਿਓਂ 45 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਢਕਿਆ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

  • ਇੰਜਣ ਜਾਂ ਮੋਟਰ ਨਾਲ ਚੱਲਣ ਵਾਲੇ ਟੋਕੇ ਦਾ ਰੁਗ ਪਿੱਛੇ ਖਿੱਚਣ ਵਾਸਤੇ ਗਿਅਰ ਦਾ ਲੀਵਰ ਕਾਮੇ ਦੇ ਨੇੜੇ ਲੱਗਿਆ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

  • ਪੱਠੇ ਕੁਤਰਣ ਵਾਲਾ ਟੋਕਾ ਪੱਕੀ ਨੀਂਹ, ਛਾਂਵੇਂ ਅਤੇ ਖੁੱਲ੍ਹੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਥੇ ਚਾਨਣ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

ਗ. ਅੱਗ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਹਦਾਇਤਾਂ

  • ਟਰੈਕਟਰ ਜਾਂ ਇੰਜਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਮੇਂ ਇਸਦਾ ਸਾਈਲੈਂਸਰ ਉੱਪਰ ਨੂੰ ਰੱਖੋ।

  • ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਗਹਾਣੀ ਦਾ ਕੰਮ ਬਿਜਲੀ ਦੀਆਂ ਤਾਰਾਂ ਤੋਂ ਦੂਰ ਕਰੋ। ਇਹ ਤਾਰਾਂ ਕੰਬਾਈਨ ਦੀ ਛਤਰੀ ਤੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਉੱਚੀਆਂ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ।

  • ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਸਮੇਂ ਲੱਗੀ ਅੱਗ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਕਰਨ ਵਾਸਤੇ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਪਹਿਲਾਂ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ।

  • ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਨਾੜ ਨੂੰ ਅੱਗ ਨਾ ਲਾਉ। ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਤੂੜੀ ਬਣਾਓ।

ਹੋਰ ਖੇਤੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਸੁਚੇਤਾਵਾਂ

ਘ. ਟਰੈਕਟਰ ਚਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਹੋਰ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ

  • ਟਰੈਕਟਰ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਟਰੈਨਿੰਗ ਪ੍ਰਾਪਤ ਅਤੇ ਲਾਈਸੈਂਸਧਾਰਕ ਡਰਾਈਵਰ ਹੀ ਚਲਾਏਂ।

  • ਟਰੈਕਟਰ 'ਤੇ ਸਵਾਰ ਹੋਣ ਜਾਂ ਉਤਰਨ ਲਈ ਹਮੇਸ਼ਾ ਤਿੰਨ-ਬਿੰਦੂ ਵਾਲਾ (Three-Point) ਤਰੀਕਾ ਅਪਣਾਓ।

  • ਟਰੈਕਟਰ 'ਤੇ ਕਦੇ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਵਾਰੀਆਂ ਨਾ ਬਿਠਾਓ।

  • ਢਲਾਣ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ 'ਤੇ ਟਰੈਕਟਰ ਚਲਾਉਂਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਾਵਧਾਨੀ ਰੱਖੋ।

ਙ. ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ

  • ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੇ ਨੇੜੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਡਣ ਨਾ ਦੇਵੋ।

  • ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਰਸਾਇਣਾਂ (ਦਵਾਈਆਂ) ਨੂੰ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਪਹੁੰਚ ਤੋਂ ਦੂਰ ਰੱਖੋ।

  • ਟਰੈਕਟਰ ਜਾਂ ਹੋਰ ਮਸ਼ੀਨਾਂ 'ਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਸਵਾਰੀ ਕਰਾਉਣਾ ਖ਼ਤਰਨਾਕ ਹੈ।

ਚ. ਸਿਹਤ ਸੰਭਾਲ

  • ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਧੂਪ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਸਿਰ ਢੱਕਣ ਲਈ ਟੋਪੀ ਜਾਂ ਸਾਫ਼ਾ ਪਹਿਨੋ।

  • ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਲੂ ਲੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਖੂਬ ਸਾਰਾ ਪਾਣੀ ਪੀਂਦੇ ਰਹੋ।

  • ਰਸਾਇਣਾਂ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਮੇਸ਼ਾ ਹੱਥ-ਮੂੰਹ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਸਾਬਣ ਨਾਲ ਧੋ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

Farm Accident Prevention & Compensation Guide  Punjab Mandi Board Scheme


ਹਾਦਸੇ ਹੋਣ ਤੇ ਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ (ਪੰਜਾਬ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਸਕੀਮ)

ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਰਾਹੀਂ ਇਸ ਸਕੀਮ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਕਿਸਾਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਮੈਂਬਰ ਅਤੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮਜ਼ਦੂਰ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਜਿਹੜੇ:

  • ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਦੇ ਸੰਦਾਂ ਨਾਲ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ।

  • ਜਿਹੜੇ ਟਿਊਬਵੈੱਲ ਲਾਉਣ ਅਤੇ ਟਿਊਬਵੈੱਲ ਵਾਸਤੇ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ।

  • ਜਿਹੜੇ ਕਾਮੇ ਦਵਾਈ ਅਤੇ ਦਵਾਈ ਛਿੜਕਣ ਵਾਲੀਆਂ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਅਤੇ ਸੱਪ ਕੱਟਣ ਨਾਲ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।

  • ਜਿਹੜੇ ਕਾਮੇ ਮਾਰਕੀਟ ਕਮੇਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ।

  • ਖੇਤੀ ਜਿਨਸਾਂ ਦੀ ਢੋਆ ਢੋਆਈ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ।

ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ ਦੇ ਰੇਟ

ਸੱਟ ਦੀ ਕਿਸਮਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ ਦਾ ਵੇਰਵਾ (ਰੁਪਏ)
ਮੌਤ ਹੋ ਜਾਣ ਤੇ2,00,000/-
ਦੋਵੇਂ ਲੱਤਾਂ, ਦੋਵੇਂ ਬਾਹਵਾਂ ਜਾਂ ਦੋਵੇਂ ਪੈਰ ਵੱਢੇ ਜਾਣ ਤੇ60,000/-
ਇੱਕ ਲੱਤ, ਇਕ ਬਾਂਹ, ਇਕ ਪੈਰ ਜਾਂ ਇਕ ਹੱਥ ਵੱਢੇ ਜਾਣ ਤੇ40,000/-
ਚਾਰੇ ਉਂਗਲਾਂ ਵੱਢੀਆਂ ਜਾਣ ਤੇ40,000/-
ਇਕ ਉਂਗਲ ਵੱਢੀ ਜਾਣ ਤੇ10,000/-
ਸਰੀਰਕ ਅੰਗਾਂ ਦੇ 25% ਤੋਂ ਵੱਧ ਨਕਾਰਾ ਹੋਣ ਤੇ50,000/- ਤੋਂ 1,00,000/-

ਫ਼ਾਰਮ ਭਰਨ ਦਾ ਤਰੀਕਾ
ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਦੀ ਸਕੀਮ ਮੁਤਾਬਕ ਹਾਦਸੇ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਜਾਂ ਉਸਦੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਹਾਦਸੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 30 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ-ਵਿੱਚ ਫ਼ਾਰਮ ਭਰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਜੇ ਦੇਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਕਾਰਣ ਦੱਸਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਫ਼ਾਰਮ ਵਿੱਚ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋਏ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਅਤੇ ਸੱਟ ਦੀ ਮਿਕਦਾਰ ਦੱਸਣੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਫ਼ਾਰਮ ਸਰਪੰਚ ਅਤੇ ਪੰਚਾਇਤ ਦੇ ਦੋ ਮੈਂਬਰਾਂ ਜਾਂ ਮਿਊਂਸਪਲ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਤੋਂ ਤਸਦੀਕ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਹਾਦਸੇ ਦੇ ਸ਼ਿਕਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਹਾਦਸੇ ਦੀ ਪੁਲਿਸ ਰਿਪੋਰਟ ਅਤੇ ਸਬ-ਡਵੀਜ਼ਨਲ ਮਜਿਸਟ੍ਰੇਟ, ਪਟਵਾਰੀ ਜਾਂ ਤਹਿਸੀਲਦਾਰ ਤੋਂ ਵੀ ਤਸਦੀਕ ਕਰਾਉਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਜੇ ਇਲਾਜ ਹੋਇਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸੱਟ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਵਿੱਚ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਜੇ ਹਾਦਸੇ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਅਪੰਗ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਚੀਫ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫ਼ਸਰ ਦਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਨਾਲ ਲਾਉਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ। ਹਾਦਸੇ ਦੇ ਸ਼ਿਕਾਰ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਹਲਫ਼ੀਆ ਬਿਆਨ (Affidavit) ਵੀ ਦੇਣਾ ਪਵੇਗਾ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਅਦਾਰੇ ਤੋਂ ਇਸੇ ਹਾਦਸੇ ਲਈ ਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਹੀਂ ਮੰਗ ਰਿਹਾ।


ਹਲਫ਼ਨਾਮਾ (Affidavit) ਫਾਰਮੈਟ

(ਇਹ ਇੱਕ ਨਮੂਨਾ ਹੈ। ਅਸਲ ਫਾਰਮ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਕਾਰਜਾਲਯ ਵਿੱਚ ਮਿਲੇਗਾ)

ਹਲਫ਼ਨਾਮਾ

ਮੈਂ, ____________________________ [ਪੂਰਾ ਨਾਮ], ਪਿਤਾ ____________________________, ਨਿਵਾਸੀ ____________________________ [ਪੂਰਾ ਪਤਾ], ਤਹਿਸੀਲ ____________________________, ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ____________________________, ਇਹ ਹਲਫ਼ੀਆ ਦੇਦਾ/ਦੇਦੀ ਹਾਂ ਕਿ:

  1. ਮੈਂ ਇੱਕ ਕਿਸਾਨ/ਖੇਤ ਮਜ਼ਦੂਰ ਹਾਂ।

  2. ਮੈਨੂੰ ਦਿਨਾਂਕ //________ ਨੂੰ, ____________________________ [ਸਥਾਨ ਦਾ ਨਾਮ] ਵਿਖੇ, ਖੇਤੀ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ____________________________ [ਹਾਦਸੇ ਦਾ ਸੰਖੇਪ ਵੇਰਵਾ] ਦਾ ਹਾਦਸਾ ਪੇਸ਼ ਆਇਆ।

  3. ਉਪਰੋਕਤ ਹਾਦਸੇ ਕਾਰਨ ਮੈਨੂੰ/ਮੇਰੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਮੈਂਬਰ ____________________________ [ਨਾਮ] ਨੂੰ ____________________________ [ਚੋਟ ਦਾ ਵੇਰਵਾ] ਦੀ ਚੋਟ ਆਈ ਹੈ।

  4. ਮੈਂ ਇਹ ਵੀ ਹਲਫ਼ੀਆ ਦੇਦਾ/ਦੇਦੀ ਹਾਂ ਕਿ ਮੈਂ ਉਪਰੋਕਤ ਹਾਦਸੇ ਲਈ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਰਕਾਰੀ, ਅਰਧ-ਸਰਕਾਰੀ ਜਾਂ ਨਿਜੀ ਬੀਮਾ ਕੰਪਨੀ/ਅਦਾਰੇ ਤੋਂ ਕੋਈ ਮੁਆਵਜ਼ਾ ਜਾਂ ਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਭਵਿੱਖ ਵਿੱਚ ਮੰਗਣੀ ਹੈ।

  5. ਮੈਂ ਪੰਜਾਬ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਖੇਤੀ ਹਾਦਸਾ ਬੀਮਾ ਸਕੀਮ ਅਧੀਨ ਮਾਲੀ ਸਹਾਇਤਾ ਲਈ ਆਪਣਾ ਦਾਅਵਾ ਪੇਸ਼ ਕਰਦਾ/ਕਰਦੀ ਹਾਂ।

ਮੈਂ ਇਹ ਹਲਫ਼ਨਾਮਾ ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਲਈ ਦੇ ਰਿਹਾ/ਰਹੀ ਹਾਂ ਕਿ ਉਪਰੋਕਤ ਦੱਸੀਆਂ ਗਈਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਬਾਤਾਂ ਸੱਚੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਮੈਂ ਇਸਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਕਰਦਾ/ਕਰਦੀ ਹਾਂ।

ਹਲਫ਼ੀਆ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਦੇ ਹਸਤਾਖਰ:


ਨਾਮ: _________________________
ਪਤਾ: _________________________

ਮੇਰੇ ਸਾਹਮਣੇ ਹਲਫ਼ੀਆ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ:

ਨੋਟਰੀ ਪਬਲਿਕ/ਗਜ਼ਟਡ ਅਫਸਰ ਦੇ ਹਸਤਾਖਰ ਅਤੇ ਮੋਹਰ

ਨਾਮ: _________________________
ਪਦਨਾਮ: _________________________
ਮੋਹਰ:
ਤਾਰੀਖ: _________________________


(ਨੋਟ: ਇਹ ਫਾਰਮ ਭਰਨ ਲਈ ਆਪਣੇ ਨੇੜਲੇ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਗ੍ਰਾਮ ਸਭਾ/ਪੰਚਾਇਤ ਦੇ ਸਕੱਤਰ ਤੋਂ ਸਹੀ ਮਾਰਗਦਰਸ਼ਨ ਅਤੇ ਅਪਡੇਟਡ ਫਾਰਮ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰੋ।)



--- **... (ਲੇਖ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕੰਟੈਂਟ ਇੱਥੇ ਖਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ) ...** --- ### **ਸੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ 'ਤੇ ਸਾਂਝਾ ਕਰਨ ਲਈ ਹੈਸ਼ਟੈਗ

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ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਨੋਟ:
ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਿਰਫ਼ ਸਿੱਖਿਆ ਅਤੇ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਲਈ ਹੈ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪੰਜਾਬ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ (PAU) ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਮੰਡੀ ਬੋਰਡ ਦੇ ਸਰੋਤਾਂ 'ਤੇ ਅਧਾਰਿਤ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ PAU ਦੇ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਚੁਣੌਤੀ ਦੇ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਅਸਲੀ ਅਪਡੇਟਡ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਤੇ ਸਹਾਇਤਾ ਲਈ ਸੰਬੰਧਿਤ ਅਧਿਕਾਰਤ ਵਿਭਾਗਾਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ।

Important Note:
This information is for educational and awareness purposes only. All information provided here is based on sources from Punjab Agricultural University (PAU) and Punjab Mandi Board. We are not making any claims nor challenging any rights of PAU. For actual updated information and assistance, please contact the relevant official departments.

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